Discover in-depth astrological insights and 2026 predictions for इस्लामिक कैलेंडर 2026.
इस्लाम में कैलेंडर मुख्यतः चाँद के चक्र पर आधारित होता है, जिसे हिजरी कैलेंडर कहा जाता है। वर्ष 2026 (हिजरी 1447‑1448) में कई अहम त्योहार और धार्मिक तिथियाँ आने वाली हैं, जिनका पालन मुसलमान दुनियाभर में करते हैं। नीचे इन तिथियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया है।
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इस दिन ईश्वर के आदेश से पैगंबर मोहम्मद साहब का स्वर्गारोहण (इस्रा व मि‘राज) हुआ था। वर्ष 2026 में यह आयोजन 16 जनवरी को होगा।
मुसलमान इस दिन की मूर्त पूजा नहीं करते, बल्कि रात में नमाज, दुआ और सज्जन व्यवहार के माध्यम से इसे याद करते हैं।
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पवित्र महीने रमज़ान का आरंभ वर्ष 2026 में 18 फरवरी को अनुमानित है।
इस महीने मुसलमान रोज़ा रखते हैं, सहरी और इफ्तार करते हैं, विशेष नमाज़ अदा करते हैं और आत्मावलोकन करते हैं।
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रमज़ान के अंतिम दस दिनों में आने वाली रातों में से एक, लेयलतुल कदर, विशेष महत्व रखती है।
इस रात को हजार महीनों की उपासना से श्रेष्ठ माना गया है और मुसलमान विशेष दुआ और नमाज़ करते हैं।
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रमज़ान के अंत में पड़ने वाला पर्व ईद‑उल‑फ़ित्र वर्ष 2026 में 20 मार्च को मनाया जाएगा।
यह दिन रोज़े के बाद खुशी और धन्यवाद का प्रतीक है। मुसलमान नमाज़ अदा करते हैं, त्योहारी भोजन करते हैं और जरूरतमंदों को ज़कात/फितरा देते हैं।
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हिजरी कैलेंडर का नया साल यानी मुहऱ्रम 16 जून 2026 को आएगा।
यह दिन उपवास, आत्मचिंतन और धार्मिक सोच का अवसर माना जाता है।
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मुहऱम का दसवाँ दिन, जिसे अशूरा कहा जाता है, 25 जून 2026 को अनुमानित है।
मुसलमान इस दिन इबादत करते हैं और पीड़ितों की याद में विशेष ध्यान और ज़िक्र करते हैं।
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हज का प्रमुख दिन (दिन‑ए‑अराफ़ा) 26 मई 2026 को और उसके अगले दिन ईद‑उल‑अधा 27 मई 2026 को होगा।
ईद‑उल‑अधा को बलिदान की ईद भी कहा जाता है। यह उस समर्पण का स्मरण है जब इब्राहीम ने ईश्वर के आदेश के अनुसार अपने बच्चे को बलिदान करने के लिए तैयार किया।
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इस्लामिक कैलेंडर, जिसे हिजरी कैलेंडर भी कहा जाता है, चंद्रमा के चक्र पर आधारित है। वर्ष 2026 (हिजरी 1447‑1448) में मुसलमान दुनियाभर में कई महत्वपूर्ण पर्व और इबादती अवसर मनाएंगे। इस ब्लॉग में पूरे साल की महत्वपूर्ण इस्लामिक तिथियों और त्यौहारों का विवरण सूचीबद्ध किया गया है।
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इस्लामिक कैलेंडर 2026 की प्रमुख तिथियाँ मुसलमानों के लिए धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व रखती हैं। इन अवसरों के माध्यम से व्यक्ति अपनी आस्था को मजबूत करता है, समाज में सेवा का भाव जगाता है और भाईचारे का संदेश फैलाता है। ध्यान रखें कि चंद्र दर्शन और स्थानीय धार्मिक अधिकारियों की पुष्टि से तिथियाँ एक‑दो दिन आगे या पीछे हो सकती हैं।
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