- Unknown
- Nov 01, 2025
तुलसी विवाह कब है, तुलसी विवाह का महत्व, तुलसी विवाह की पूजा विधि, तुलसी विवाह मंत्र, तुलसी विवाह कथा
तुलसी विवाह एक पवित्र हिंदू पर्व है जिसमें माता तुलसी और भगवान विष्णु का विवाह संपन्न होता है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन मनाया जाता है, जिसे देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि में पुनः शुभ कार्यों का आरंभ होता है।
तुलसी विवाह 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
तिथि:
सोमवार, 9 नवंबर 2026शुभ मुहूर्त:
प्रातः 6:30 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक(स्थानीय समय और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर संभव है।)
तुलसी विवाह का धार्मिक महत्व
तुलसी विवाह का आयोजन करने से व्यक्ति को कन्यादान का फल प्राप्त होता है। यह पर्व भक्ति, प्रेम और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ तुलसी विवाह का आयोजन करता है, उसके घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।
तुलसी विवाह करने से वैवाहिक जीवन में शांति, प्रेम और स्थिरता आती है।
तुलसी विवाह की पूजा विधि
- प्रातः स्नान के बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करें और तुलसी के पौधे को चौकी पर रखें।
- तुलसी चौरा को फूलों, दीपक और रंगोली से सजाएँ।
- भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप को तुलसी के समीप स्थापित करें।
- भगवान विष्णु और तुलसी माता को हल्दी, सिंदूर, चंदन, फूल और फल अर्पित करें।
- मंगलसूत्र और वस्त्रों से तुलसी विवाह की प्रतीकात्मक रस्में पूरी करें।
- पूजा के अंत में तुलसी माता और विष्णु भगवान के विवाह मंत्रों का उच्चारण करें।
तुलसी विवाह मंत्र
मंत्र 1:
"ॐ तुलस्यै नमः"मंत्र 2:
"देवि त्वं निर्मिता पूर्वं विष्णुना विश्वरूपिणि।तुलसी प्रीत्यर्थं देहि मह्यम् परमं सुखम्॥"
मंत्र 3 (विवाह समय):
"ॐ तुलसीं विवाहयामि श्रीनारायणाय नमः।"तुलसी विवाह कथा
पुराणों के अनुसार तुलसी देवी का पूर्व जन्म वृंदा नामक स्त्री के रूप में हुआ था। वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थीं और उनके पति जालंधर दैत्य थे। जब भगवान विष्णु ने जालंधर का वध किया, तब वृंदा ने शाप दिया कि विष्णु पत्थर बन जाएँ। उनके शाप से भगवान विष्णु शालिग्राम बने और वृंदा तुलसी पौधे के रूप में उत्पन्न हुईं।
तब से भगवान विष्णु और तुलसी माता का विवाह तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाने लगा।
तुलसी विवाह के लाभ
- घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण बनता है।
- परिवार में प्रेम और सौहार्द की वृद्धि होती है।
- विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
तुलसी विवाह का आध्यात्मिक संदेश
तुलसी विवाह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रेम, निष्ठा और समर्पण का प्रतीक है। तुलसी माता हमें सिखाती हैं कि सच्चे प्रेम और श्रद्धा से किया गया कर्म ईश्वर को प्रसन्न करता है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में भक्ति, पवित्रता और प्रेम से ही सच्ची शांति और सफलता मिलती है।
निष्कर्ष
तुलसी विवाह 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक संबंध में विश्वास, प्रेम और निष्ठा का संदेश देता है। इस दिन तुलसी और भगवान विष्णु के विवाह का आयोजन करके हम न केवल परंपरा निभाते हैं, बल्कि अपने घर और जीवन में शुभता का आमंत्रण भी देते हैं।
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