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वैदिक अनुष्ठानों के आवश्यक उपकरण | AstronKundali

पारम्परिक यज्ञ-पात्रों की जानकारी को आधुनिक व संक्षिप्त भाषा में प्रस्तुत किया गया है — 

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वैदिक अनुष्ठानों के आवश्यक उपकरण
  • ashish nishad
  • Nov 20, 2025

वैदिक अनुष्ठानों के आवश्यक उपकरण

पारम्परिक यज्ञ-पात्रों की जानकारी को आधुनिक व संक्षिप्त भाषा में प्रस्तुत किया गया है — 

1. स्रुवा

स्रुवा एक विशेष लकड़ी से निर्मित लंबी चम्मच के समान पात्र होता है। इसका उपयोग हवन में घी की आहुति देने के लिए किया जाता है। यह आकार और बनावट में ऐसा होता है कि अग्नि में आहुति नियंत्रित रूप से डाली जा सके।

2. प्रोक्षणी

प्रोक्षणी वह पात्र है जिसमें जल भरकर यज्ञ-वेदिका के चारों ओर छिड़का जाता है। इसका उद्देश्य वेदी के आसपास शीतलता और पवित्रता बनाए रखना होता है।
दिशा-विशेष प्रसेचन के मंत्र निम्न हैं:

  • पूर्व दिशा: ॐ अदितेऽनुमन्यस्व॥
  • पश्चिम दिशा: ॐ अनुमतेऽनुमन्यस्व॥
  • उत्तर दिशा: ॐ सरस्वत्यनुमन्यस्व॥

चारों दिशाओं में प्रसेचन के लिए मंत्र:
ॐ देव सवितः प्रसुव यज्ञं प्रसुव यज्ञपतिं भगाय। दिव्यो गन्धर्वः केतपूः केतं नः पुनातु, वाचस्पतिः वाचं नः स्वदतु॥

3. प्रणीता

प्रणीता एक पात्र है जिसमें यज्ञ के दौरान जल रखा जाता है। घी की आहुति पूरी होने के बाद बचे हुए घी को “इदं न मम” कहते हुए इसी पात्र में टपकाया जाता है। बाद में इस घृत-स्पर्शित जल का अल्प मात्रा में ग्रहण करना संसव प्राशन कहलाता है।

4. सलाका / मनुकश

वज्र-यज्ञ जैसे विशिष्ट अनुष्ठानों में सलाका (या मनुकश) का प्रयोग यजमान को अशुभ प्रभावों से सुरक्षा देने के लिए किया जाता है। अनुष्ठान की प्रमुख क्रियाएँ पूर्ण होने के बाद इसे यजमान के बाएँ हाथ में धारण कराया जाता है।

5. स्रुची

स्रुची वह पात्र है जिसके माध्यम से यज्ञ या हवन में मिष्ठान (मीठे पदार्थ) की पूर्णाहुति दी जाती है। इस पूर्णाहुति को स्विष्टकृत होम कहा जाता है। इसका उद्देश्य यज्ञ में यदि कोई कमी रह गई हो तो उसे पूर्ण करना है।

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1. स्रुवा (घृत-आहुतिदान चम्मच)

लंबी पतली दण्ड जैसी लकड़ी की छड़, जिसके सिरे पर छोटा—गोल या अर्धगोल—कप जैसा हिस्सा होता है। आकार कुछ वैसा जैसे लंबा हैंडल और छोटा गोल चम्मच।

सामग्री

  • काष्ठ (आम, पलाश, खैर, बेल आदि की लकड़ी)
  • आधुनिक रूप: तांबा या स्टेनलेस स्टील भी उपयोग होता है, परंतु परंपरागत रूप में लकड़ी श्रेष्ठ मानी जाती है।

आकार

  • लंबाई लगभग 12–18 इंच
  • सिरे का कप छोटा, लगभग 2–3 सेमी गहरा

आधुनिक प्रयोग-शैली

  • नियंत्रित आहुति देने के लिए, ताकि घी की मात्रा समान रहे।
  • गैस या इलेक्ट्रिक हवनकुण्ड के साथ भी सुरक्षित रूप से प्रयोग हो सकता है।

2. प्रोक्षणी (जल-प्रोक्षण पात्र)

लंबे हैंडल के साथ छोटा गोल कटोरा जैसा पात्र, जिसमें जल भरा रहता है।
दिखने में यह एक छोटी "लोटा-चम्मच" की तरह लगता है।

सामग्री

  • लकड़ी
  • तांबा
  • आधुनिक रूप: स्टेनलेस स्टील या तांबे का अधिक उपयोग

आकार

  • लंबाई 10–15 इंच
  • कटोरे की क्षमता 50–100 मिली

आधुनिक प्रयोग-शैली

  • जल प्रसेचन के लिए—हवनकुण्ड के चारों ओर जल छिड़क कर शांति एवं ऊर्जा-संतुलन का भाव स्थापित किया जाता है।
  • स्वास्थ्य कारणों से ताम्र-निर्मित प्रोक्षणी अधिक लोकप्रिय हो रही है।

3. प्रणीता (जल-धारण पात्र)

छोटा कटोरा या लंबी सुराही जैसा पात्र जिसमें ऊपर की ओर संकीर्ण मुख और नीचे गोल पेट जैसा भाग होता है। हवन में इसे यजमान के समीप रखा जाता है।

सामग्री

  • लकड़ी
  • तांबा / पीतल
  • आधुनिक रूप: स्टील या सिल्वर-प्लेटेड पात्र

आकार

  • क्षमता लगभग 250–500 मिली
  • ऊँचाई 6–8 इंच

आधुनिक प्रयोग-शैली

  • आहुति के अंत में “इदं न मम” कहते हुए घी की शेष बूंदें इसी में डालते हैं।
  • संसव-प्राशन — प्रणीता के जल को पवित्रता के प्रतीक रूप में अल्प मात्रा में ग्रहण किया जाता है।

4. सलाका / मनुकश (संरक्षण-दण्ड)

पतली, उँगली-जितनी मोटाई वाली दण्डाकार लकड़ी। इसकी सतह चिकनी होती है और ऊपर का सिरा सामान्यतः गोल।
कुछ अनुष्ठानों में इसे हल्की नक्काशी के साथ बनाया जाता है।

सामग्री

  • काष्ठ (खासकर पलाश, खैर या उडुम्बर)
  • आधुनिक रूप में साधारण लकड़ी भी प्रयुक्त

आकार

  • लंबाई 6–8 इंच
  • व्यास लगभग 1–1.5 सेमी

आधुनिक प्रयोग-शैली

  • वज्र-यज्ञ या विशेष रक्षात्मक अनुष्ठानों में यजमान के बाएँ हाथ में धारण कराया जाता है।
  • इसे मानसिक-ऊर्जा संरक्षण के प्रतीक के रूप में उपयोग किया जाता है, ठीक वैसे जैसे आजकल आध्यात्मिक ब्रेसलेट धारण किए जाते हैं।

5. स्रुची (पूर्णाहुति दान पात्र)

यह आकार में स्रुवा जैसा होता है, परंतु इसका सिरा थोड़ा चौड़ा और गहरा होता है ताकि मिष्ठान (हलवा, खीर, पायसम आदि) की आहुति सुरक्षित रूप से दी जा सके।

सामग्री

  • लकड़ी
  • तांबा
  • आधुनिक रूप: स्टेनलेस स्टील, सिल्वर-कोटेड स्रुची

आकार

  • लंबाई 12–16 इंच
  • सिरा लगभग 3–4 सेमी चौड़ा

आधुनिक प्रयोग-शैली

  • विशेष पूर्णाहुति देने के लिए, जिसे स्विष्टकृत होम कहा जाता है।
  • जब हवन में किसी प्रकार की कमी या त्रुटि लगे, तो स्रुची द्वारा दी गई पूर्णाहुति उसे संतुलित करती है।

In a Vedic fire ritual, several special utensils are used for different purposes.

Sruva

is a long, ladle-like tool used for offering ghee into the sacred fire. 

Prokṣaṇī

has a long handle with a round cup-like end and is used for sprinkling water around the sacrificial altar for purification. 

Praṇīta

is a bowl or pitcher-shaped vessel that holds water, which is used for ācamana (ritual sipping) and later for saṃsava-prāśana

Salākā

or

Manukaśa

is a slender wooden rod given to the yajamāna (sacrificer) to hold in the left hand during specific rituals as a symbol of protection. Finally, 

Srucī

, similar to the sruva but with a wider tip, is used to offer sweet food (the final pūrṇāhuti) in the sviṣṭakṛt homa, completing the ritual.

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