- ashish nishad
- Nov 05, 2025
कार्तिक पूर्णिमा व्रत 2025
कार्तिक पूर्णिमा व्रत
कार्तिक पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की पूजा का विशेष महत्व होता है। यह तिथि दान-पुण्य, तीर्थ स्नान और दीपदान के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत, दीपदान और कथा श्रवण करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
व्रत और पूजा विधि:
1. प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
2. भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें।
3. दीपदान करें — विशेषकर गंगा या किसी पवित्र नदी के तट पर।
4. तुलसी के पौधे के समक्ष दीप जलाना अत्यंत शुभ होता है।
5. व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस दिन ब्राह्मणों को भोजन और दान देना चाहिए।
6. शाम के समय भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन या भजन करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता:
ऐसा माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताओं ने त्रिपुरासुर का वध किया था, इसलिए इसे "देव दीपावली" भी कहा जाता है। इस दिन दीप जलाने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में
त्रिपुरासुर
नामक एक अत्याचारी दैत्य था। उसने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या करके तीन नगर (त्रिपुर) प्राप्त किए — एक सोने का, एक चाँदी का और एक लोहे का। ये नगर आकाश, पृथ्वी और पाताल में स्थित थे। इन नगरों के कारण उसे “त्रिपुरासुर” कहा गया। वह बहुत शक्तिशाली बन गया और उसने देवताओं, ऋषियों तथा मनुष्यों को अत्याचारों से पीड़ित करना शुरू कर दिया।त्रिपुरासुर की अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी देवता
भगवान शिव
के पास पहुँचे और उनसे विनती की कि वे इस दैत्य का अंत करें। भगवान शिव ने वचन दिया कि उचित समय आने पर वह त्रिपुरासुर का वध करेंगे।त्रिपुरासुर के तीनों नगर आकाश में एक साथ केवल
कार्तिक मास की पूर्णिमा
के दिन ही एक सीध में आते थे।उस शुभ अवसर पर भगवान शिव ने पार्थिव रथ पर सवार होकर, पृथ्वी को रथ, सूर्य और चंद्रमा को चक्र, ब्रह्मा को सारथी, और विष्णु को बाण बनाकर, त्रिपुरासुर का वध किया।
जब त्रिपुरासुर का नाश हुआ, तब देवताओं ने प्रसन्न होकर दीपक जलाए और जय-जयकार की। उसी दिन से
देव दीपावली
का पर्व मनाया जाने लगा। इसीलिए कार्तिक पूर्णिमा को दीपदान और व्रत का अत्यंत महत्व है।फलश्रुति (फल):
जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से कार्तिक पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और शिव की आराधना करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है। इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान और दीपदान करने से सहस्त्र अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।Leave a Comment
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