- ashish nishad
- Jan 20, 2026
दश महाविद्या: तारा , ज्योतिष, साधना और शक्ति का पूर्ण मार्गदर्श
दश महाविद्या शाक्त संप्रदाय की प्रमुख देवियाँ हैं, और तारा उनमें से एक हैं। भगवती तारा साधना और सिद्धि की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। उनका ध्यान करने से व्यक्ति ऐश्वर्यशाली बन सकता है और योग मार्ग से मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
देवी तारा का स्वरूप और महत्व
तारा माता का स्वरूप तीन प्रकार से देखा जाता है:
तारा
एकजटा
नील सरस्वती
वे शत्रुओं का नाश करने वाली, ऐश्वर्य और सुंदरता देने वाली, आर्थिक और भौतिक उन्नति प्रदान करने वाली देवी हैं।
प्रमुख तीर्थ और साधना
तारापीठ (पश्चिम बंगाल, बीरभूम जिला)
: यहाँ देवी सती के नेत्र गिरे थे, इसलिए इसे ‘नयन तारा’ भी कहा जाता है। महर्षि वशिष्ठ ने इस स्थान पर तारा की आराधना करके सिद्धियाँ प्राप्त की थीं।विन्ध्य पर्वत
: माता का जटा रूप यहां देखा जाता है।नृसिंग पीठ (मध्य प्रदेश)
: देवी नील सरस्वती रूप में विद्यमान हैं।शोघी (हिमाचल प्रदेश)
: तारा देवी का प्रसिद्ध मंदिर यहाँ स्थित है।
तिब्बती बौद्ध धर्म में भी देवी तारा का महत्वपूर्ण स्थान है।
देवी तारा की कथाएँ
- देवी तारा राजा दक्ष की पुत्री मानी जाती हैं।
- समुद्र मंथन के समय हलाहल विष पान करने के दौरान शिव की पीड़ा दूर करने में तारा माता ने अमृतमय दुग्ध स्तन पान कर उनका उद्धार किया।
- रामायण में देवी तारा ने रावण के वध में राम को शक्ति प्रदान की।
तांत्रिक साधना और रूप
तारा माता का निवास स्थान घोर महाश्मशान माना जाता है। वे ज्वलंत चिता पर खड़े, प्रत्यालीढ़ मुद्रा में, नग्न अवस्था में, सर्प आभूषण और हड्डियों की माला से अलंकृत दिखाई देती हैं। उनके तीन नेत्र और उग्र स्वरूप उन्हें भयानक बनाते हैं।
साधना का समय:
चैत्र मास की नवमी तिथि और शुक्ल पक्ष विशेषत: लाभकारी मानी जाती है।मंत्र:
नीले कांच की माला से बारह माला प्रतिदिन जाप –ऊँ ह्नीं स्त्रीं हुम फट
(जप विधि विशेषज्ञ से पूछकर ही करें)
तारा का दैवीय स्वरूप
शिव रूप:
अक्षोभ्यविष्णु रूप:
मत्स्य
तारा माता घोर संकटों से मुक्ति देने वाली और मोक्ष प्रदाता महान शक्ति हैं। उनका साधन या ध्यान करने से भक्त के समस्त कार्य सिद्ध होते हैं।
यहाँ
देवी तारा (महाविद्या)
के बारे में वैज्ञानिक/पारंपरिक रूप सेविश्वसनीय स्रोतों और शास्त्रीय संदर्भों
के आधार पर स्पष्ट ढंग से जानकारी दी गई है — ताकि आप जान सकें कि देवी तारा का उल्लेख किन ग्रंथों/तंत्रों में मिलता है और उनके पूजा/साधना का मूल आधार क्या है: (Wikipedia)1. तंत्र और तांत्रिक स्रोत (Primary Tantric Scriptures)
देवी तारा की उपासना और स्वरूप का विवरण कई तंत्र ग्रंथों में मिलता है। ये ग्रंथ तंत्र शास्त्र के मूल स्रोत माने जाते हैं:
प्रमुख तांत्रिक ग्रंथ
ये ग्रंथ देवी तारा के स्वरूप, साधना और तंत्र पर केन्द्रित हैं:
ताराटनत्र (Tārātantra)
नीलाटनत्र / बृहन्नीलाटनत्र (Nīlatantra/Bṛhannīlatantra)
ब्रह्मयामल (Brahmayāmala)
रुद्रयामल (Rudrayāmala)
नीलसरस्वतीतनत्र (Nīlasarasvatītantra)
तारा रहस्य (Tārārahasya)
तंत्रसार (Tantrasara)
जैसे तांत्रिक साहित्य में भी वर्णन मिलता है (Wikipedia)
ये ग्रंथ तंत्रवादी परंपरा में देवी तारा की पूजा, मन्त्र, स्वरूप, साधना और सिद्धि विधियों को विस्तार से बताते हैं। (Wikipedia)
2. पुराणों में उल्लेख
देवी तारा का उल्लेख कुछ हिन्दू पुराणों में भी मिलता है:
देवी भागवतम् (Devi Bhagavata Purana)
में तारा का वर्णन मिलता है, जिसमें बताया गया है कि उन्हेंनील सरस्वती
रूप में जाना जाता है और कुछ विशेष कथाएँ भी वर्णित हैं। (Everything Explained Today)कालीका पुराण (Kalika Purana)
के कुछ अध्यायों में भी तारा महाविद्या का उल्लेख मिलता है। (Everything Explained Today)
यद्यपि ये पुराण तंत्र ग्रंथों जितने विस्तृत नहीं हैं, परंतु देवी तारा का पौराणिक संदर्भ भी प्रदान करते हैं। (Everything Explained Today)
3. स्तोत्र और मंत्र ग्रंथ
देवी तारा के
स्तोत्र और हृदय मंत्र (Hridaya-stotram / Beej mantras)
भी तंत्रग्रंथों या तांत्रिक परंपरा में पाए जाते हैं। इन स्तोत्रों का प्रयोग साधना में होता है — उदाहरण के लिए:- श्री तारा हृदय स्तोत्रम् – जो पार्वती/शिव संवाद पर आधारित श्लोकों का समूह है। (Pasar88)
4. इतिहास और परंपरा का संदर्भ
तारा महाविद्या
को दस महाविद्याओं मेंदूसरे स्थान पर
वर्णित किया गया है। (Wikipedia)- बंगाल में
तारापीठ
जैसे शक्तिपीठों में तारा की पूजा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है, और वहाँ की परंपरा स्थानीय महात्माओं और सिद्ध साधकों से जुड़ी हुई है। (Wikipedia)
5. बौद्ध परंपरा और तारा
महाविद्या तारा का नाम बौद्ध धर्म में भी महत्वपूर्ण रूप से मिलता है, जहाँ तारा को
शान्ति, करुणा और मोक्ष की देवी (सग्रोमा / दोल्मा)
के रूप में पूजा जाता है। यह हिन्दू साधना परंपरा से अलग वज्रयान बौद्ध दृष्टिकोण है, लेकिन नाम, अर्थ और स्वरूप के समान से प्रेरित है। (hindi.newsgram.com)सारांश: असल शास्त्रीय स्रोत कौन से हैं?
स्रोतप्रकारमहत्ताताराटनत्र, नीलाटनत्र, ब्रह्मयामल, रुद्रयामल
तंत्र ग्रंथतारा साधना और स्वरूप का मूल आधारतारा रहस्य, तंत्रसार, नीलसरस्वतीतनत्र
तांत्रिक साहित्यविस्तृत मंत्र, पूजा विधिदेवी भागवतम्, कालीका पुराण
पुराणपौराणिक संदर्भ और कथास्तोत्र / तारा हृदय स्तोत्रम्
भक्तिशास्त्रपूजा और स्तुति श्लोक
महादेव
आशीष निषाद
Leave a Comment
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!