- Jai Narayan Sharma
- Oct 25, 2025
jupiter in kark
द्वादश राशिफल ????????????
बृहस्पति 18 अक्टूबर, 2025 को कर्क अपनी उच्च राशि में प्रवेश करेगा और 5 दिसंबर, 2025 तक रहेगा।
पुनर्वसु नक्षत्र मैं जो स्व नक्षत्र भी है गुरु अपनी सर्वोच्च गरिमा के साथ ज्ञान, विस्तार, आशीर्वाद और धार्मिक विकास लाता है।
यहाँ सभी 12 राशियों का विवरण दिया जा रहा है, जिसे आप लग्न और चंद्र राशि के अनुसार भी समझ सकते हैं।
मेष राशि ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके घर, माता, भावनात्मक स्थिरता और संपत्ति के चतुर्थ भाव में प्रवेश करेगा। घर से संबंधित लाभ, आंतरिक उपचार या पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए यह एक सुंदर समय है। माता का आशीर्वाद और सुख कई गुना बढ़ जाता है।
उपाय: घर में तुलसी का एक छोटा सा पौधा रखने से बृहस्पति के आशीर्वाद मैं वृद्धि होगी।
वृषभ ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके साहस, संचार, भाई-बहनों और पराक्रम के तृतीय भाव में गोचर कर रहा है। आप नई शिक्षा, छोटी यात्राएँ या रचनात्मक लेखन शुरू करने के लिए प्रयास करेंगे।
आपके शब्दों में उपचारात्मक गुण होंगे।
उपाय: गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से दिव्य सुरक्षा और ज्ञान प्राप्त होता है।
मिथुन ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके धन, परिवार और वाणी के द्वितीय भाव से गोचर कर रहा है। संचार के माध्यम से वित्तीय अवसरों, पारिवारिक आशीर्वाद और मान्यता में अचानक वृद्धि होगी। बचत और निवेश के लिए शुभ।
उपाय: गुरुवार को बच्चों को पीली मिठाई दान करने से समृद्धि बढ़ती है।
कर्क ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके प्रथम भाव में प्रवेश कर रहा है। यह ईश्वरीय कृपा, आत्मविश्वास और आशीर्वाद का समय है। स्वास्थ्य में सुधार होगा, आपकी आभा निखरेगी और नए अवसर खुलेंगे। गुरु की कृपा आपको आकर्षक बनाती है।
उपाय: गुरुवार को पीला या सुनहरा वस्त्र पहनने से उच्च का बृहस्पति मजबूत होता है।
सिंह ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके द्वादश भाव में प्रवेश करेगा। आध्यात्मिक उन्नति, स्वप्न मार्गदर्शन और मोक्ष-कर्म की प्राप्ति होगी। खर्चे बढ़ सकते हैं, लेकिन दान और आध्यात्मिक विकास भी होगा। यह एकांतवास, ध्यान और ईश्वरीय आशीर्वाद का समय है।
उपाय: गुरुवार को भगवान विष्णु को केला चढ़ाने से कर्म ऋण से मुक्ति मिलती है।
कन्या ☝️
प्रभाव: बृहस्पति आपके लाभ, नेटवर्क और इच्छाओं के एकादश भाव में गोचर करेगा। आपकी इच्छाएँ तेज़ी से पूरी होंगी, नई मित्रताएँ सौभाग्य लाएँगी और आय के स्रोत बढ़ेंगे। सामाजिक दायरे में विस्तार और पहचान मिलेगी।
उपाय: लाभ प्राप्त करने के लिए अपने बटुए में सोने का सिक्का या पीला क्रिस्टल रखें।
तुला ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके करियर, अधिकार और कर्म के दशम भाव में प्रवेश करेगा। प्रतिष्ठा, करियर के अवसरों और मान्यता में एक शक्तिशाली वृद्धि होगी। नेतृत्वकारी भूमिकाओं और धार्मिक कार्यों के लिए अच्छा समय है।
उपाय: स्थिरता और विकास के लिए अपने कार्यस्थल में गोमती चक्र रखें।
वृश्चिक ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके धर्म, भाग्य, पिता और उच्च ज्ञान के नवम भाव में गोचर करेगा। ईश्वरीय आशीर्वाद प्रबलता से प्रवाहित हो रहा है—यह कृपा, आध्यात्मिक उन्नति और अप्रत्याशित सौभाग्य का समय है। गुरु और मार्गदर्शक प्रकट होते हैं।
उपाय: गुरुवार को भगवान विष्णु को घी का दीपक जलाने से गुप्त भाग्य जागृत होता है।
धनु ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके परिवर्तन, गुप्त विद्या, उत्तराधिकार और रहस्यों के अष्टम भाव में प्रवेश कर रहा है। यह गुप्त आशीर्वाद, आध्यात्मिक जागृति या उत्तराधिकार लाभ ला सकता है। मंत्र, तंत्र, ज्योतिष के लिए अच्छा समय है।
उपाय: अचानक होने वाले कर्म परिवर्तनों को स्थिर करने के लिए अपने बिस्तर के पास पानी से भरा चाँदी का बर्तन रखें।
मकर राशि ❤️
प्रभाव: बृहस्पति आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है जो रिश्तों और साझेदारियों का भाव है। विवाह, वैवाहिक सामंजस्य में सुधार या मज़बूत व्यावसायिक साझेदारियाँ बनाने के लिए यह उत्तम समय है। रिश्ते सुखद रहेंगे।
उपाय: माँ लक्ष्मी को पीले फूल अर्पित करने से रिश्तों में सामंजस्य और समृद्धि बनी रहेगी।
कुंभ राशि ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके स्वास्थ्य, सेवा और चुनौतियों के छठे भाव में गोचर कर रहा है। आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे, कर्ज़ कम होंगे और स्वास्थ्य में सुधार होगा। अनुशासित सेवा और आध्यात्मिक सेवा के लिए यह अच्छा समय है।
उपाय: प्रतिदिन कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक छोटी पीली नोटबुक रखने से बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है।
मीन राशि ????
प्रभाव: बृहस्पति आपके रचनात्मकता, संतान, प्रेम और उच्च ज्ञान के पंचम भाव में प्रवेश कर रहा है। रोमांस, संतान संबंधी आशीर्वाद, आध्यात्मिक रचनात्मकता और मंत्र सिद्धि के लिए यह एक शानदार समय है। शिक्षा और ज्ञानार्जन के लिए यह एक अच्छा समय है।
उपाय: प्रतिदिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करने से ईश्वरीय सुरक्षा मजबूत होती है और आनंद की प्राप्ति होती है।
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