- Jai Narayan Sharma
- Oct 26, 2025
rahu in 7
राहू सप्तम भाव में / शास्त्र व्याख्या के दृष्टिकोण से ????
जातक अपव्ययी स्त्री का पति, स्त्री नाशक, दुष्कर्मी, प्रमेह, वात एवं गुप्त (जननेद्रिय) रोगों से पीड़ित, विधवा स्त्री से सम्बंध रखने वाला, विवाह के समय से ही पत्नी रुग्ण एवं व्याधि पीड़ित होना सम्भावित एवं द्विभार्या योग वाला होता है l
पहली पत्नी रक्त विकार एवं दूसरी पत्नी यकृत विकार से ग्रसित होना सम्भव है l
किन्तु ऐसे जातक विवादी एवं उग्र स्वभाव के होते है, जिस कारण दाम्पत्य मे प्रायः मतभेद बढ़ जाते हैं! प्रायः ऐसा जातक व्यवसाय में हानि उठाने वाला कटुभाषी, लोक निन्दित, लोभी, धनवान, चतुर, कलही एवं अनेक भोगों को भोगने वाला होता है l
37 वर्ष की अवस्था में स्त्री को कष्ट l
यदि राहू अनेक ग्रहों से युक्त हो तो, पति या पत्नी दुष्ट स्वभाव के, पाप वृत्ति वाले होते हैं l
यदि पाप ग्रहों से युक्त हों तो जातक कुटिल, पापाचारी होना सम्भव है l
यदि राहू शुभ ग्रहों से युक्त हो तो उपरोक्त दोष रहते हैं किन्तु द्विभार्या अथवा बहु विवाह योग अत्यंत न्यून हो जाता है l
jay sharma
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